Laxmi Puja Vidhi 2018 In Hindi PDF : Mantra Kaise Kare

Laxmi Puja Vidhi 2018 In Hindi PDF : Mantra Kaise Kare

laxmi puja vidhi laxmi puja vidhi in hindi :-  pdf laxmi puja vidhi in marathi daily lakshmi puja vidhi mahalaxmi puja vidhi in marathi lakshmi puja vidhi at home how to do laxmi puja at home laxmi puja vidhi in marathi pdf laxmi ji ki puja kaise kare

卐 ॥ ॐ श्री गणेशाय नमः ॥ 卐 Diwali 2018

दीपावली पूजन का मतलब है –माता  लक्ष्मी जी की पूजा के साथ  कलश, नवग्रह, षोडशमातृका, श्री गणेश, महालक्ष्मी, महासरस्वती और श्री कुबेर की पूजा की जाए ।

About Laxmi Puja Vidhi 2018 In Hindi

laxmi puja book pdf in hindi laxmi puja vidhi in marathi pdf daily lakshmi puja vidhi lakshmi puja vidhi at home laxmi ji ki puja kaise kare laxmi puja in marathi laxmi puja vidhi in sanskrit pdf laxmi puja mantra in hindi

लक्ष्मी पूजा मुहूर्त  (07 November -Wednesday – 2018)
  • लक्ष्मी पूजा मुहूर्त =  (17:57 to 19:53)
    अवधि =  (1 Hour 55 Mins)
    प्रदोष काल =  (17:27 to 20:06)
    वृषभ काल =  (17:57 to 19:53)
    अमावस्या तिथि प्रारम्भ =  6 नवंबर 2018 को   रात 10: 27 (22:27) बजे
    अमावस्या तिथि समाप्त = 7 नवंबर 2018 को रात 09 : 31  (21:31) बजे तक

धन, संपत्ति यानि की  पैसा वर्तमान में इंसान की सबसे बड़ी जरुरत है। पैसे से ही मनुष्य के जीवन की कई जरुरतें पूरी होती हैं। धन, संपत्ती, समृद्धि का एक नाम लक्ष्मी भी है। लक्ष्मी भगवान विष्णु की पत्नी हैं। लोगो का मानना है कि मां लक्ष्मी की कृपा से ही घर में धन, संपत्ती समृद्धि आती है। जिस घर में मां लक्ष्मी का वास नहीं होता वहां दरिद्रता घर कर लेती है। इसलिये मां लक्ष्मी का प्रसन्न होना बहुत जरुरी माना जाता है और उन्हें प्रसन्न करने के लिये की जाती है मां लक्ष्मी की पूजा। आइये आपको बताते हैं कि क्या है लक्ष्मी पूजन की विधि और पूजा के के लिये चाहिये कौनसी सामग्री?

कौन हैं लक्ष्मी

देवी लक्ष्मी को धन और सम्रद्धि की देवी कहा जाता है। सनातन धर्म के विष्णु पुराण में बताया गया है कि लक्ष्मी जी भृगु और ख्वाती की पुत्री हैं और स्वर्ग में यह वास करती थी। समुद्रमंथन के समय लक्ष्मी जी की महिमा का व्याख्यान वेदों में बताया गया है। लक्ष्मी जी ने विष्णु जी को अपने पति के रुप में वरण किया जिससे इनकी शक्तियां और प्रबल हुई मानी जाती हैं।

लक्ष्मी का अभिषेक दो हाथी करते हैं। वह कमल के आसन पर विराजमान है। लक्ष्मी जी के पूजन में कमल का विशेष महत्त्व बताया गया है। क्योकि यह फूल कोमलता का प्रतीक है इसलिए माँ लक्ष्मी जी की पूजा में इसका स्थान आता है। लक्ष्मी जी के चार हाथ बताये गये हैं। वे एक लक्ष्य और चार प्रकृतियों (दूरदर्शिता, दृढ़ संकल्प, श्रमशीलता एवं व्यवस्था शक्ति) के प्रतीक हैं और माँ लक्ष्मी जी सभी हाथों से अपने भक्तों पर आशीर्वाद की वर्षा करती हैं। इनका वाहन उल्लू को बताया गया है जो निर्भीकता का सूचक है।माता लक्ष्मीजी के पूजन की सामग्री अपने सामर्थ्य के अनुसार होना चाहिए। इसमें लक्ष्मीजी को कुछ वस्तुएँ विशेष प्रिय हैं। उनका उपयोग करने से वे शीघ्र प्रसन्न होती हैं। इनका उपयोग अवश्य करना चाहिए। वस्त्र में इनका प्रिय वस्त्र लाल-गुलाबी या पीले रंग का रेशमी वस्त्र है। माताजी को पुष्प में कमल व गुलाब प्रिय है। फल में श्रीफल, सीताफल, बेर, अनार व सिंघाड़े प्रिय हैं। सुगंध में केवड़ा, गुलाब, चंदन के इत्र का प्रयोग इनकी पूजा में अवश्य करें। अनाज में चावल तथा मिठाई में घर में बनी शुद्धता पूर्ण केसर की मिठाई या हलवा, शिरा का नैवेद्य उपयुक्त है।

माँ लक्ष्मी जी की मुख्य पूजा तो वैसे दिवाली पर की जाती है किन्तु लक्ष्मी पूजा निरंतर करना, और भी ज्यादा फलदायक माना जाता है।

लक्ष्मी पूजन के लिये सामग्री :

मां लक्ष्मी की पूजा के लिये सामग्री अपने सामर्थ्य के अनुसार जुटा सकते हैं। मां लक्ष्मी को जो वस्तुएं प्रिय हैं उनमें लाल, गुलाबी या फिर पीले रंग का रेशमी वस्त्र लिया जा सकता है। कमल और गुलाब के फूल भी मां को बहुत प्रिय हैं। फल के रुप में श्री फल, सीताफल, बेर, अनार और सिंघाड़े भी मां को पसंद हैं। अनाज में चावल घर में बनी शुद्ध मिठाई, हलवा, शिरा का नैवेद्य उपयुक्त है। दिया जलाने के लिये गाय का घी, मूंगफली या तिल्ली का तेल इस्तेमाल किया जाता है। इसके अलावा पूजन में रोली, कुमकुम, पान, सुपारी, लौंग, इलायची, चौकी, कलश, मां लक्ष्मी व भगवान श्री गणेश जी की प्रतिमा या चित्र, आसन, थाली, चांदी का सिक्का, धूप, कपूर, अगरबत्तियां, दीपक, रुई, मौली, नारियल, शहद, दही गंगाजल, गुड़, धनियां, जौ, गेंहू, दुर्वा, चंदन, सिंदूर, सुगंध के लिये केवड़ा, गुलाब अथवा चंदन के इत्र ले सकते हैं।Laxmi Puja Vidhi 2018 In Hindi

 

Deepawali Laxmi Puja Vidhi 2018 In Hindi

सबसे पहले पूजा के जलपात्र से थोड़ा जल लेकर मूर्तियों के ऊपर छिड़कें इससे मूर्तियों का पवित्रकरण हो जायेगा, इसके पश्चात स्वयं को, पूजा सामग्री एवं अपने आसन को भी पवित्र करें। पवित्रीकरण के दौराण निम्न मंत्र का जाप करें-Laxmi Puja Vidhi 2018 In Hindi

ॐ अपवित्र: पवित्रो वा सर्वावस्थां गतोपि वा।

य: स्मरेत् पुण्डरीकाक्षं स: वाह्याभंतर: शुचि:।।

इसके बाद जिस जगह पर आसन बिछा है उस जगह को भी पवित्र करें और मां पृथ्वी को प्रणाम करें। इस प्रक्रिया में निम्न मंत्र का उच्चारण करें-

laxmi puja book pdf in hindi laxmi puja vidhi in marathi pdf daily lakshmi puja vidhi lakshmi puja vidhi at home laxmi ji ki puja kaise kare laxmi puja in marathi laxmi puja vidhi in sanskrit pdf laxmi puja mantra in hindi

पृथ्विति मंत्रस्य मेरुपृष्ठः ग ऋषिः सुतलं छन्दः कूर्मोदेवता आसने विनियोगः॥

ॐ पृथ्वी त्वया धृता लोका देवि त्वं विष्णुना धृता।

त्वं च धारय मां देवि पवित्रं कुरु चासनम्‌॥

पृथिव्यै नमः आधारशक्तये नमः

अब आचमन करें
पुष्प, चम्मच या अंजुलि से एक बूंद पानी अपने मुंह में छोड़िए और बोलिए-
ॐ केशवाय नमः

और फिर एक बूंद पानी अपने मुंह में छोड़िए और बोलिए-
ॐ नारायणाय नमः
फिर एक तीसरी बूंद पानी की मुंह में छोड़िए और बोलिए-
ॐ वासुदेवाय नमः

फिर ॐ हृषिकेशाय नमः कहते हुए हाथों को खोलें और अंगूठे के मूल से होंठों को पोंछकर हाथों को धो लें। पुनः तिलक लगाने के बाद प्राणायाम व अंग न्यास आदि करें। आचमन करने से विद्या तत्व, आत्म तत्व और बुद्धि तत्व का शोधन हो जाता है तथा तिलक व अंग न्यास से मनुष्य पूजा के लिए शुद्ध  हो जाता है।
आचमन आदि के बाद आंखें बंद करके मन को स्थिर कीजिए और तीन बार गहरी सांस लीजिए। यानी प्राणायाम कीजिए क्योंकि भगवान के साकार रूप का ध्यान करने के लिए यह आवश्यक है फिर पूजा के प्रारंभ में स्वस्तिवाचन किया जाता है। उसके लिए हाथ में पुष्प, अक्षत और थोड़ा जल लेकर स्वतिनः इंद्र वेद मंत्रों का उच्चारण करते हुए परम पिता परमात्मा को प्रणाम किया जाता है।

Laxmi Pooja Sankalp :-

संकल्प के लिये हाथ में अक्षत, पुष्प और जल लें साथ में कुछ द्रव्य यानि पैसे भी लें अब हाथ में लेकर संकल्प मंत्र का जाप करते हुए संकल्प किजिये कि मैं अमुक व्यक्ति, अमुक स्थान एवं समय एवं अमुक देवी-देवता की पूजा करने जा रहा हूं, जिससे मुझे शास्त्रोक्त फल प्राप्त हो।

संकल्प लेने के बाद भगवान श्री गणेश व मां गौरी की पूजा करें। इसके बाद कलश पूजें। हाथ में थोड़ा जल लेकर आह्वान व पूजन मंत्रों का उच्चारण करें फिर पूजा सामग्री चढायें। फिर नवग्रहों की पूजा करें, इसके लिये हाथ में अक्षत और पुष्प लेकर नवग्रह स्तोत्र बोलें।उसके बाद भगवती षोडश मातृकाओं की पूजा करें।  माताओं की पूजा के बाद रक्षाबंधन करें। रक्षाबंधन के लिये मौलि लेकर भगवान गणपति पर चढाइये फिर अपने हाथ में बंधवा लीजिये और तिलक लगा लें। इसके बाद महालक्ष्मी की पूजा करें।

दीपक पूजन (Lamp worshiper) :-

अब दीपक को जलाएंगे  और कुछ  फूल  हाथ में लेकर दीपक का ध्यान करते हुए दीप पूजन मंत्र का उच्चारण करें और  फूल  दीपक के पास छोड़े ।और यह मंत्र बोले
भो दीप देवरूप: त्वं कर्मसाक्षी हि अविघ्नकृत्।
यावत् कर्म समाप्ति: स्यात् तावत् अत्र स्थिरोभव ॥

गुरु की पूजा :-

गुरु का चित्र चौकी पर दाएँ हाथ की ओर ही रखे| सबसे पहले गुरु के चित्र को गीले कपडे से पोंछे, उसके बाद रोली,धूप-दीप,चंदन,फूल  चढ़ायें। फिर दोनों हाथ जोड़कर गुरु के सामने  प्रार्थना करें।और यह मन्त्र बोले –Laxmi Puja Vidhi 2018 In Hindi

गुरु: ब्रह्मा गुरु: विष्णु: गुरु: देवो महेश्वर:।
गुरु: साक्षात्परब्रह्म तस्मै श्री गुरुवे नम:।।
अखण्ड मण्डलाकारं व्याप्तं येन चराचरम् ।
तत्पदं दर्शितं येन तस्मै श्री गुरवे नमः ।।
ॐ गुरुवे नम:। ॐ परम गुरुवे नम:।
ॐ परातार गुरुवे नम:। ॐ परमेश्टी गुरुवे नम:।
ॐ गुरु पंक्ते नम:।

Laxmi मंगलतिलक (Mangal Tilak ) :-

अब आप मंगलतिलक करेंगे और इस मंत्र को बोले –

आदित्या वसवो रुद्रा विश्वेदेवा मरुद्गणा:
तिलकं ते प्रयच्छन्तु सर्व कार्य अर्थ सिद्धये॥
इस मंत्र का उच्चारण करते हुए दाएं हाथ से तिलक लगाएं। इसके बाद मौली को बाँधें मौली हमेशा  पुरुष की दाई कलाई और स्त्री की बाई कलाई पर ही  बाँधे

रक्षा सूत्र मंत्र (Raksha Sutr Mantra ) :-

मौली बाँधते हुये रक्षा-सूत्र मंत्र  यह मन्त्र बोले यह मन्त्र बहुत प्रचलित है

येन बद्धो बलिःराजा दानवेन्द्रो महाबलः ।
तेन त्वामनुबध्नामि रक्षे मा चल मा चलः ॥

स्वस्तिवाचन (Swastivaachan) :-

फिर पूजा के प्रारंभ में स्वस्तिवाचन किया जाता है। उसके लिए हाथ में पुष्प, अक्षत और थोड़ा जल लेकर स्वतिनः इंद्र वेद मंत्रों का उच्चारण करते हुए परम पिता परमात्मा को प्रणाम किया जाता है दाएँ हाथ में अक्षत-पुष्प एवं ताम्बूल लेकर स्वस्तिवाचन करें:-

स्वस्तिन: इन्द्रो वृद्ध श्रवाः ।
स्वस्ति नः पूषा विश्ववेदाः ।
स्वस्तिन: स्तार्क्ष्यो अरिष्टनेमिः ।
स्वस्ति नो वृहस्पति: दधातु ॥
पय: पृथिव्यां पय: ओषधीषु
पयो दिव्यंतरिक्षे पयोधा:।
पयस्वती: प्रदिश: सन्तु मह्यम्।
विष्णो रराटमसि विष्णो: श्नप्त्रेस्थो विष्णो:
स्यू:असि विष्णो: ध्रुवो असि।वैष्णवमसि विष्णवेत्त्वा
ॐ द्यौः शान्ति: अन्तरिक्षग्वं शान्तिः
पृथिवी शान्ति: आपः शान्ति: औषधयः शान्तिः ।
वनस्पतयः शान्ति: विश्वेदेवाः शान्ति: ब्रह्म शान्तिः
सर्वग्वं शान्तिः शान्ति: एव शान्तिः सा मा शान्तिरेधि ॥
ॐ गणानां त्वा गणपति ग्वं हवामहे प्रियाणां त्वा
प्रियपति ग्वं हवामहे निधीनां त्वा निधिपति ग्वं हवामहे
व्वसो मम।आहमजानि गर्ब्भधम् आत्त्वमजासि गर्ब्भधम्।
ॐ अम्बे अम्बिके अम्बालिके न मा नयति कश्चन।
ससस्त्य श्वक: सुभद्रिकां काम्पील वासिनीम्॥
उसके बाद अक्षत , ताम्बूल गणेश जी के पास छोड़ दें।

गौरी-ग़णेश स्मरण : –

अब गौरी गणेश की पूजा करेंगे उसके लिए दाएँ हाथ में अक्षत-पुष्प लेकर  नीचे लिखे हुए मंत्र का उच्चारण करे और माता गौरी और गणेश जी का ध्यान करें:-
गजाननं भूतगणादि सेवितं कपित्थजम्बूफलचारुभक्षणम्।
उमासुतं शोकविनाशकारकं नमामि विघ्नेश्वरपादपंकजम् ॥
शुक्लाम्बर धरं विष्णुं शशिवर्णं चतुर्भुजम् ।
प्रसन्नवदनं ध्यायेत् सर्व विघ्न उपशान्तये ॥
अभीप्सित अर्थ सिध्यर्थं पूजितो य: सुरासुरै:।
सर्वविघ्नहर:तस्मै गणाधिपतये नम:॥
सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके ।
शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते ॥
हाथ में लिए हुए अक्षत एवं पुष्प गणेशा और गौरी पर चढ़ा दे

सभी देवताओं- गौरी,गणेश,विष्णु का ध्यान  ,नमस्कार :-

हाथ मे अक्षत लेकर नाम के साथ थोड़-थोड़ा अक्षत छोड़ें ।हर मन्त्र को बोलने के बाद अक्षत छोड़े
ॐ सर्वेभ्योदेवेभ्यो नम: 
ॐ सर्वेभ्यो ब्राह्मणेभ्यो नम:
ॐ मातृ-पितृ चरणकमलेभ्यो नम: 
ॐ एतत् कर्मप्रधानदेवता महालक्ष्म्यै नम: 
॥ इति नमस्कृत्य ॥

माँ लक्ष्मी जी की पूजा के लिए वेदों में कई महत्वपूर्ण मन्त्र दिये गये हैं। ऋग्वेद में एक स्थान पर  माँ लक्ष्मी जी को प्रसन्न करने के लिए निम्न मंत्र का उल्लेख किया गया है और इस मन्त्र का उच्चारण करने से लक्ष्मी माँ अवश्य आपकी मनोकामना पुरी करेंगी |

 

धनमग्निर्धनं वायुर्धनं सूर्यो धनं वसुः।

धनमिन्द्रो बृहस्पतिर्वरुणं धनमस्तु ते।।

 

अश्वदायै गोदायै धनदायै महाधने।

धनं मे जुषतां देवि सर्वकामांश्च देहि मे।।

 

मनसः काममाकूतिं वाचः सत्यमशीमहि।

पशूनां रूपमन्नस्य मयि श्रीः श्रयतां यशः ।।

 

लक्ष्मी जी की पूजा करते समय  साफ़-सफाई का विशेष ध्यान दिया जाना चाहिये। दीपावली के  पावन अवसर पर मां लक्ष्मी की पूजा के बाद दीपक पूजन करें इसके लिये तिल के तेल के सात, ग्यारह, इक्कीस अथवा ज्यादा दीपक जलाए और सभी को  एक थाली में रखकर पूजा करें।दीपक पूजन के बाद घर की महिलायें अपने हाथ से सोने-चांदी के समस्त आभूषण इत्यादि को मां लक्ष्मी के चरणों में अर्पित कर दें। अगले दिन स्नान के बाद विधि-विधान से पूजा के बाद आभूषण एवं सुहाग की अन्य सामग्री जो अर्पित की थी उसे मां लक्ष्मी का प्रसाद समझकर स्वयं प्रयोग करें। मन जाता है कि ऐसा करने  से मां लक्ष्मी की कृपा सदा बनी रहती है।मां लक्ष्मी अपने भक्तों की धन से जुड़ी हर तरह की समस्याएं दूर करती हैं. इतना ही नहीं, देवी साधकों को यश और कीर्ति भी देती हैं.आइए सबसे पहले जान लेते हैं कि कौन हैं मां लक्ष्मी और इनकी महिमा क्या है.

Laxmi Puja Vidhi 2018 In Hindi

  • मां लक्ष्मी धन और संपत्ति की देवी हैं
  • माँ लक्ष्मी का जन्म समुद्र से हुआ और इन्होंने श्रीविष्णु से विवाह किया.
  • माँ लक्ष्मी की पूजा से धन,वैभव  की प्राप्ति होती है
  • घोर दरिद्रता का सामना तभी करना पड़ता है.जब लक्ष्मी नाराज हो जाती है
  • ज्योतिष में शुक्र ग्रह से लक्ष्मी जी का  सम्बन्ध जोड़ा जाता है.

Laxmi Puja Vidhi 2018 In Hindi

  • लक्ष्मी जी की  पूजा से केवल धन ही नहीं, बल्कि नाम, यश भी मिलता है.
  • लक्ष्मी जी की  उपासना से दाम्पत्य जीवन भी बेहतर होता है.
  •  अगर  धन की समस्या हो, तो  विधि विधान से  लक्ष्मीजी की पूजा की जाए, तो धन की प्राप्ति होती  है.

Laxmi Puja Vidhi 2018 In Hindi pdf

  • मां लक्ष्मी की पूजा लाल और  गुलाबी वस्त्र पहनकर करनी चाहिए |
  • माँ लक्ष्मी जी की पूजा का उत्तम समय मध्य रात्रि का समय होता है |
  • मां लक्ष्मी के उस स्वरुप की पूजा करनी चाहिए, जिसमें वह गुलाबी कमल के फूल  पर बैठी हों. साथ ही उनके हाथों से धन बरस रहा हो |
  • मां लक्ष्मी को गुलाबी पुष्प, विशेषकर कमल चढ़ाना सबसे अच्छा  रहता है.
  • मां लक्ष्मी के मन्त्रों का जाप स्फटिक की माला से करने पर वह तुरंत प्रभावशाली होता है.
  • मां लक्ष्मी के विशेष स्वरूप हैं, जिनकी उपासना शुक्रवार के दिन करने से विशेष लाभ की प्राप्ति होती है.

 

 

धन लक्ष्मी की पूजा नियमित धन प्राप्ति के लिए : Laxmi Puja Vidhi 2018 In Hindi

  • मां लक्ष्मी के उस चित्र की स्थापना की जानी चाहिए , जिसमें उनके हाथों से धन गिर रहा हो.
  • चित्र के सामने  घी का एक बड़ा सा दीपक जलाएं.
  • इसके बाद इत्र समर्पित करें.
  • वही इत्र नियमित रूप से प्रयोग करें.
  • वृष, कन्या और मकर राशि‍ वालों के लिए धन लक्ष्मी की पूजा बहुत लाभकारी होती है.

धान्य लक्ष्मी की पूजा धन  बचत के लिए : Laxmi Puja Vidhi 2018 In Hindi

  • मां लक्ष्मी के उस स्वरूप की पूजा की जानी चाहिए , जिसमें उनके पास अनाज की ढेरी हो.या चावल की ढेरी पर लक्ष्मीजी का स्वरूप स्थापित करें.
  • लक्ष्मी जी के  सामने घी का दीपक जलाएं, और उन्हें चांदी का सिक्का चढ़ाये
  • पूजा के बाद उसी चांदी के सिक्के को उस स्थान पर रखे जहा आप धन रखते हो
  • मिथुन, तुला और कुम्भ राशि‍ वालों के लिए धान्य लक्ष्मी के स्वरूप की आराधना अदभुत  होती है.

गज लक्ष्मी की पूजा कारोबार में धन प्राप्ति के लिए : Laxmi Puja Vidhi 2018 In Hindi

  • लक्ष्मीजी के उस चित्र को स्थापित करें, जिसमें दोनों तरफ उनके साथ हाथी हों.
  • लक्ष्मीजी के सामने  घी के तीन दीपक जलाएं.
  •  मां लक्ष्मी को एक गुलाब का फूल अर्पित करें.
  • पूजा के बाद  उसी गुलाब को अपने धन वाली जगह पर रख दें. रोज इस गुलाब को बदल दें.
  • वृष, कन्या, धनु, मकर और मीन राशि‍ के कारोबारी लोगों के लिए गजलक्ष्मी की पूजा अदभुत  होती है.

ऐश्वर्य लक्ष्मी की पूजा नौकरी में धन बढ़ोतरी के लिए :\Laxmi Puja Vidhi 2018 In Hindi

  • गणेशजी के साथ लक्ष्मीजी की स्थापना करें.
  •  गणेशजी को पीले और लक्ष्मीजी को गुलाबी फूल चढ़ाएं.
  • लक्ष्मीजी के चरणों में अष्टगंध  अर्पित करें.
  • रोज सुबह  नहाने के बाद उसी अष्टगंध का तिलक लगाएं.
  • कर्क, वृश्चिक और मीन राशि‍ के लिए ऐश्वर्य लक्ष्मी की पूजा विशेष होती है.

वर लक्ष्मी की पूजा धन नुकसान से बचने के लिए : Laxmi Puja Vidhi 2018 In Hindi

  • लक्ष्मीजी के उस स्वरूप की स्थापना करें, जिसमें वह खड़ी हों और धन दे रही हों.
  •  उनके चरणों में नित्य प्रातः एक रुपये का सिक्का अर्पित करें.
  • महीने के अंत तक सिक्को को एकत्रित करते जाए और फिर किसी सौभाग्यवती स्त्री को दे दें.
  •  मेष, सिंह और धनु राशि‍ के लोगों के लिए वरलक्ष्मी के स्वरूप की पूजा बहुत अदभुत होती है.

Laxmi Puja Tips In Hindi :

• पान के पत्ते को उल्टा करके उस पर लौंग इलायची सुपारी एवं कुछ मीठा रखें इस प्रकार  ताम्बूल बनाये
•  तीनपत्ती वाली दुर्वा जरुर होनी चहिये ।
• गणेश जी पर तुलसी की पत्तियां ना चढ़ायें ।
• लक्ष्मी जी को कमल का फूल बहुत प्रिय है ।इसलिए कमल का  फूल चढ़ाये
• धरती  पर गिरा हुआ ,बासी ,कीड़ा खाया हुआ फूल कभी भी भगवान पर न चढ़ायें ।
• नदी मे, मंदिर में या पीपल के नीचे  पुरानी ,टूटी फूटी मुर्तियों को विसर्जित करे ।
• धन पाने के लिये लक्ष्मी मंत्र कमलगट्टे की माला पर जपना बहुत अच्छा  होता है।
• धन पाने के लिये लाल आसन अच्छा  रह्ता है ।
• पूजा करते समय या मंत्र उच्चारण के वक्त  हाथ मे फूल या चावल अवश्य रखें अर्थात  हाथ कभी भी खाली ना रहे
• पूजा करते समय घी का दीपक भगवान की मूर्ति के दाई ओर एवं तेल का दीपक बाई ओर रखे। धूप जल पात्र बाई ओर ही रखें ।
• पूजा करते समय रक्षा सूत्र (मौली) बांधते समय हाथ मे पैसा एवं अक्षत ले, खाली हाथ रक्षा सूत्र नहीं बंधवाना चाहिए |
• पूजा करते समय साबुत लाल चावल अपने पास जरुर रखे क्योकि कभी किसी चीज़ कमी पड़ जाये तो आप उसकी जगह साबुत लाल चावल चढ़ा सकते है ।
•दीपावली पूजा करने के बाद सभी सामग्री को सारी रात उसी  स्थान पर रहने दे। भगवान की मूर्तियों को भी उसी  जगह पुरी रात रखा रहने दे | गणेश लक्ष्मी जी की मूर्ति को विसर्जन नहीं करना है, एक साल रखना चाहिए ,अगले साल जब नई मूर्तियाँ खरीदी जाती है तब पूजा करने के बाद उन पुरानी मूर्तियों को  विसर्जित कर देना चाहिए|
•चढ़ाई हुइ सभी वस्तुओ को  किसी ब्राह्मण को दे अगर कोई ब्राह्मण न हो तो मंदिर में दान कर दे |

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *