Diwali Puja Vidhi In Hindi : दीपावली की पूजा कैसे करे

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Diwali Puja Vidhi In Hindi : दीपावली की पूजा कैसे करे

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दीपावली को दीवाली के नाम से भी जाना जाता है । दीपावली हिन्दुओं के प्रमुख त्योहारों में से एक है । इसे कार्तिक मास की अमावस्या के दिन मनाया जाता है । यह प्रकाश पर्व है । इस दिन घर-घर प्रकाश से जगमगा उठता है ।दीपावली के दिन रात्रिकाल में धन-संपत्ति की अधिष्ठात्री देवी लक्ष्मी जी और विघ्नविनाशक व मंगलदाता गणेश जी की पूजा की जाती है । समुद्र-मंथन से प्राप्त चौदह रत्नों में लक्ष्मी भी एक रत्न थीं । लक्ष्मी रत्न का प्रादुर्भाव कार्तिक मास की अमावस्या को हुआ था । उस दिन से कार्तिक की अमावस्या लक्ष्मी-पूजन का त्योहार बन गया । लक्ष्मी के साथ-साथ गणेश की पूजा की जाती है क्योंकि गणेश धन-संपत्ति की संरक्षा करते हैं तथा सब प्रकार के अमंगलों का नाश कर सुख-समृद्धि प्रदान करते हैं ।

卐 ॥ ॐ श्री गणेशाय नमः ॥ 卐

दीपावली पूजन का मतलब है –माता  लक्ष्मी जी की पूजा के साथ  कलश, नवग्रह, षोडशमातृका, श्री गणेश, महालक्ष्मी, महासरस्वती और श्री कुबेर की पूजा की जाए ।

Diwali Puja Vidhi In Hindi : लक्ष्मी पूजा मुहूर्त (07 November -Wednesday – 2018)

लक्ष्मी पूजा मुहूर्त =  (17:57 to 19:53)
अवधि =  (1 Hour 55 Mins)
प्रदोष काल =  (17:27 to 20:06)
वृषभ काल =  (17:57 to 19:53)
अमावस्या तिथि प्रारम्भ =  6 नवंबर 2018 को   रात 10: 27 (22:27) बजे
अमावस्या तिथि समाप्त = 7 नवंबर 2018 को रात 09 : 31  (21:31) बजे तक

Diwali Puja Vidhi In Hindi : दीपावली पूजन विधि (Deepawali Pujan Vidhi )

माता लक्ष्मीजी के पूजन की सामग्री अपने सामर्थ्य के अनुसार रख सकते है लेकिन कुछ सामग्री का होना भी आवश्यक है क्योकि लक्ष्मीजी को कुछ वस्तुएँ बहुत  प्रिय हैं। उनका उपयोग करने से वे जल्दी  प्रसन्न हो जाती हैं। इनका उपयोग अवश्य करना चाहिए।लक्ष्मी जी को  वस्त्र में लाल-गुलाबी या पीले रंग का रेशमी वस्त्र अत्यंत पसंद  है आप भी पूजा करते वक्त लाल ,पीले वस्र पहने। माताजी को पुष्प में कमल व गुलाब प्रिय है।  लक्ष्मी जी को फल में श्रीफल, सीताफल, बेर, अनार व सिंघाड़े  अत्यधिक प्रिय हैं और सुगंध में केवड़ा, गुलाब, चंदन के इत्र का प्रयोग इनकी पूजा में अवश्य करें। अनाज में चावल तथा मिठाई में घर में बनी केसर की मिठाई या हलवा, शिरा का नैवेद्य रखे । दिए को जलाने के लिए  गाय का घी, मूंगफली या तिल्ली का तेललक्ष्मी जी को  ज्यादा प्रसन्न करता है। अन्य सामग्री में गन्ना, कमल गट्टा, खड़ी हल्दी, बिल्वपत्र, पंचामृत, गंगाजल, ऊन का आसन, रत्न आभूषण, गाय का गोबर, सिंदूर, भोजपत्र का पूजन में उपयोग करना जरुरी होता है |

Diwali Puja Vidhi In Hindi : दीपावली की पूजा कैसे करे

पूजन सामग्री :- 
• लक्ष्मी एवं गणेश जी की मूर्ति – मिट्टी या धातु की
(Statue of Ganesh and Laxmi – made up with any material or earthern )
• रोली 10 ग्राम (Roli 10 gm)
• मौली 2 गोला (Mauli 2 pieces)
• लौंग 10 ग्राम (Clove 10 gm)
• इलायची 10 ग्राम (Cardamon 10 gm)
• साबुत सुपारी 11 पीस (Areca nut(Supari) 11 pieces)
• इत्र 1 शीशी (Scent 1 small bottle )
• देशी घी 250 ग्राम (Ghee 250 gm)
• आम के पत्ते (एक पल्लो) (Mango Leaves (in a bunch) )
• खील 250 ग्राम (Kheel (made up from paddy) 250 gm)
• बताशा 250 ग्राम (Bataasha (type of sweet made from sugar in different shape) 250 gm )
• सिंदूर 10 ग्राम (श्री हनुमान जी वाला ) (Vermillion (sindoor) 10 gm (orange colour) )
• लाल सिंदूर की डिब्बी-1 (Red vermillion(Lal sindoor) – 1 small box)
• कपूर 10 ग्राम (Camphor (kapur) 10 gm )
• रुई की बत्ती (Cotton lint( cotton batti))
• माचिस (Matchstick – 1)
• कमल गट्टा 10 ग्राम(Kamal Gatta 10 gm )
• साबुत धनिया (Coriander whole – 5gm)
• तोरण (Festoon of ashok leaves (ashok leaves toran))
• साबुत चावल 1 किलो (Whole rice 1 kg)
• पंच पात्र या 1 गिलास (plate or glass- 1 )
• आचमनी या एक चम्मच (spoon -1)
• अर्धा या जलपात्र कलश ढ़क्कन सहित (Finial with cover( earthen pot with coverlid) – 1 )
• दीप पात्र (utensil for lamp -1)
• धूप पात्र (utensil for dhoop -1 )
• एक पानी वाला नारियल(Coconut( with water) – 1 )
• लाल कपड़ा 2.5 मीटर (चौकी पर बिछाने के लिये एवं नारियल पर लपेटने के लिये ) (Red Cloth 2 (2.5 meter each) (one for small stool and one to cover coconut))
• केसर 2 ग्राम (Saffron (Kesar) 2 gm )
• कुशासन या लाल कम्बल -आसन के लिये (Mat made up with grass/kush or red blanket – for sitting)
• सफेद कपड़ा (White cloth – 2 (2.5 meter each) )
• सफेद चंदन (White Sandalwood – 1 packet)
• लाल चंदन (Red Sandalwood- 1 packet)
• मिट्टी के 5, 11, 21 या अधिक छोटे दीपक (Small earthen lamp – 5 ,11,21 or more )
• मिट्टी का एक बडा दीपक (Big earthen lamp – 1 )
• पान के 11 पत्ते डंडी सहित (Betel leaves with stem – 11 )
• फल (ऋतु फल) (Seasonal Fruits )
• पंचमेवा (panchmeva( mix of cashew,raisins,date palm,coconut and peanuts )- 10 gm)
• दूब या दुर्बा (Grass )
• फूल (Flower)
• फूल माला (Garland )
• गणेश जी के लिये लड्डू  (Laddu for God Ganesh)
• खुले पैसे (Change rupees)
• मिठाई (sweets)
• सरसो का तेल ( Mustard oil)
• साबुत हल्दी 20 ग्राम (Whole turmeric 20 gm)
• कुमकुम या गुलाल 10 ग्राम (Gulaal 10gm)
• कलम (Ink Pen)
• स्याही की दवात (Ink bottle )
• बही खाता (Leedger Account book)
• तिज़ोरी या गुल्लक (Safe)
• एक थाली आरती के लिये (Plate – for aarati)
• कटोरी दूध दही पंचामृत के लिये (Bowl (for milk, curd, panchamrit) – 5)
• पंचामृत – दूध,दही, शहद,घी ,शक्कर (चीनी) मिलाकर बनाये (Panchamrit – (mixture of milk, curd, honeey, ghee & sugar) )
• धूप का एक पैकेट (Dhoop – 1pkt )
• पिसी हल्दी (Turmeric powder)
• कमल का फूल (Lotus flower )
• आभूषण वस्त्र (Jwellery, clothes )
• गंगाजल (Holy water (Ganga Jal))
• घंटी (Bell )
• गुड़ 100 ग्राम (Molasses 100 gm )
• चांदी का सिक्का (Silver coin)
• 2 थाली या चौकी (Plate or stool – 2 (थाली या चौकी-२))

Diwali Puja Vidhi In Hindi : ध्यान देने वाली कुछ जरुरी बाते –

• पूजा सुरु  करने से पहले गंगा जल को जलपत्र और कलश मे मिला लें ।
• पान के पत्ते को उल्टा करके उस पर लौंग इलायची सुपारी एवं कुछ मीठा रखें इस प्रकार  ताम्बूल बनाये
•  तीनपत्ती वाली दुर्वा जरुर होनी चहिये ।
• गणेश जी पर तुलसी की पत्तियां ना चढ़ायें ।
• लक्ष्मी जी को कमल का फूल बहुत प्रिय है ।इसलिए कमल का  फूल चढ़ाये
• धरती  पर गिरा हुआ ,बासी ,कीड़ा खाया हुआ फूल कभी भी भगवान पर न चढ़ायें ।
• नदी मे, मंदिर में या पीपल के नीचे  पुरानी ,टूटी फूटी मुर्तियों को विसर्जित करे ।
• धन पाने के लिये लक्ष्मी मंत्र कमलगट्टे की माला पर जपना बहुत अच्छा  होता है।
• धन पाने के लिये लाल आसन अच्छा  रह्ता है ।
• पूजा करते समय या मंत्र उच्चारण के वक्त  हाथ मे फूल या चावल अवश्य रखें अर्थात  हाथ कभी भी खाली ना रहे
• पूजा करते समय घी का दीपक भगवान की मूर्ति के दाई ओर एवं तेल का दीपक बाई ओर रखे। धूप जल पात्र बाई ओर ही रखें ।
• पूजा करते समय रक्षा सूत्र (मौली) बांधते समय हाथ मे पैसा एवं अक्षत ले, खाली हाथ रक्षा सूत्र नहीं बंधवाना चाहिए |
• पूजा करते समय साबुत लाल चावल अपने पास जरुर रखे क्योकि कभी किसी चीज़ कमी पड़ जाये तो आप उसकी जगह साबुत लाल चावल चढ़ा सकते है ।
•दीपावली पूजा करने के बाद सभी सामग्री को सारी रात उसी  स्थान पर रहने दे। भगवान की मूर्तियों को भी उसी  जगह पुरी रात रखा रहने दे | गणेश लक्ष्मी जी की मूर्ति को विसर्जन नहीं करना है, एक साल रखना चाहिए ,अगले साल जब नई मूर्तियाँ खरीदी जाती है तब पूजा करने के बाद उन पुरानी मूर्तियों को  विसर्जित कर देना चाहिए|
•चढ़ाई हुइ सभी वस्तुओ को  किसी ब्राह्मण को दे अगर कोई ब्राह्मण न हो तो मंदिर में दान कर दे |

दिवाली विशेस : लक्ष्मी जी की पूजा विधि 

लक्ष्मी जी की पूजा में जो व्यक्ति पूजा कर रहे हैं उनका मुख पूर्व अथवा उत्तर दिशा में होना चाहिये। वह व्यक्ति स्वच्छ वस्त्र धारण करे और पूजा के समय  लाल आसन  पर पत्नी तथा परिवार के साथ बैठे । यदि कम्बल या आसन ना हो तो कुश के आसन पर भी बैठा जा सकता  हैं। पूजा करते समय पति के दाईं ओर पत्नी को बैठना चाहिए |
दो चौकी लें अगर चौकी  ना हो तो थाली प्रयोग कर सकते हैं।  सबसे पहले चौकी पर सफेद वस्त्र बिछायें| चौकी पर लक्ष्मी व गणेश की मूर्तियां इस प्रकार रखें कि उनका मुख पूर्व या पश्चिम में रहे। लक्ष्मीजी, गणेशजी की दाहिनी ओर रहें। पूजनकर्ता मूर्तियों के सामने की तरफ बैठें। कलश को लक्ष्मीजी के पास चावलों पर रखें। नारियल को लाल वस्त्र में इस प्रकार लपेटें कि नारियल का आगे का भाग दिखाई देता रहे व इसे कलश पर रखें। यह कलश वरुण का प्रतीक है। सामने यजमान बैठे। आपके परिवार के सदस्य आपकी बाईं ओर बैठें। कोई आगंतुक हो तो वह आपके या आपके परिवार के सदस्यों के पीछे बैठे।उसके बाद चौकी के ऊपरी भाग के बीच में 卐 स्वास्तिक बनायें। स्वास्तिक के बायीं ओर  ॐ एवं दायीं ओर श्री: चावल से बनायें अथवा रोली घोल कर लिखें।

स्वास्तिक के नीचे ब्रह्मा, विष्णु एवं शिव को मानकर  तीन लम्बी ( खड़ी लकीर) लकीर ऊपर से नीचे की ओर खीचें।उसके बाद चौकी के निचले हिस्से  में नवग्रह- मण्डल के लिए  चावलों के नौ पुंज या रोली से नौ बिंदु बना ले ।नैऋत्यकोण के ऊपरी भाग में सप्तमातृका के लिए चावल से त्रिकोण आकार में  सात-सात पुंज या रोली से बिंदु बना लें।निचले हिस्से  में षोडशमातृका के लिए  चावल अथवा रोली घोलकर सोलह बिंदु बनायें।नवग्रह-मण्डल एवं षोडशमातृका के बीच सर्प बनाये |अगर आपको कोई भी परेशानी हो रही हो ,या आपको समझ में नहीं आ रहा है तो मै आपको नीचे एक चित्र दे रही हूँ जिससे आपको समझ में आ जायेगा

उसके बाद  एक छोटी कटोरी में, दो सुपारी को अलग-अलग लाल मौली लपेट कर रखें। स्वास्तिक के ऊपर, रख दे

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Diwali Puja Vidhi In Hindi

दूसरी चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर गणेश-लक्ष्मी की मूर्ति  हमेशा गणेश जी के दाहिनें ओर स्थापित की जाती है)। चाँदी के सिक्के को रखने   के लिये एक लाल चावल की ढेरी या अष्टदल (आठ खाने) बनाकर रख सकते हैं। सामने वाली चौकी के बायीं ओर यानि की  ईशानकोण  में चावल से अष्टदल (आठ दल / खाने) बनाकर, जल से भरा कलश रखें। कलश जल में दुर्बा, गंगाजल, सुपारी, हल्दीगांठ, सिक्का डालें। उसमें आम का पत्ता डालें और  कलश में कलावा बांधे।दोबारा  उसके ऊपर चावल से भरी कटोरी  रखें। कलश  पर, लाल वस्त्र में लपेट कर या कलावा बांधकर नारियल रखें। कलश पर स्वास्तिक  बना दें और  मूर्तियों के बाईं ओर (अर्थत् पूजा करने वाले  के दाईं ओर) तेल का दीपक, धूपबत्ती तथा दाईं ओर घी का दीपक रखें। प्रसाद, वस्त्र, फल, मिठाई, खील, बतासे, दीपक, भेंट सामग्री सामने की ओर रख ले सबसे  पहले पवित्रीकरण करें।

उसके लिए आप हाथ में पूजा के जलपात्र से थोड़ा सा जल ले लें और अब उसे मूर्तियों के ऊपर छिड़कें। साथ में मंत्र पढ़ें। इस मंत्र और पानी को छिड़ककर आप अपने आपको पूजा की सामग्री को और अपने आसन को भी पवित्र कर लें।
ॐ पवित्रः अपवित्रो वा सर्वावस्थांगतोऽपिवा।
यः स्मरेत्‌ पुण्डरीकाक्षं स वाह्यभ्यन्तर शुचिः॥
पृथ्विति मंत्रस्य मेरुपृष्ठः ग षिः सुतलं छन्दः
कूर्मोदेवता आसने विनियोगः॥

अब पृथ्वी पर जिस जगह आपने आसन बिछाया है, उस जगह को पवित्र कर लें और मां पृथ्वी को प्रणाम करके मंत्र बोलें-
ॐ पृथ्वी त्वया धृता लोका देवि त्वं विष्णुना धृता।
त्वं च धारय मां देवि पवित्रं कुरु चासनम्‌॥
पृथिव्यै नमः आधारशक्तये नमः

अब आचमन करें
पुष्प, चम्मच या अंजुलि से एक बूंद पानी अपने मुंह में छोड़िए और बोलिए-
ॐ केशवाय नमः

और फिर एक बूंद पानी अपने मुंह में छोड़िए और बोलिए-
ॐ नारायणाय नमः
फिर एक तीसरी बूंद पानी की मुंह में छोड़िए और बोलिए-
ॐ वासुदेवाय नमः

फिर ॐ हृषिकेशाय नमः कहते हुए हाथों को खोलें और अंगूठे के मूल से होंठों को पोंछकर हाथों को धो लें। पुनः तिलक लगाने के बाद प्राणायाम व अंग न्यास आदि करें। आचमन करने से विद्या तत्व, आत्म तत्व और बुद्धि तत्व का शोधन हो जाता है तथा तिलक व अंग न्यास से मनुष्य पूजा के लिए शुद्ध  हो जाता है।
आचमन आदि के बाद आंखें बंद करके मन को स्थिर कीजिए और तीन बार गहरी सांस लीजिए। यानी प्राणायाम कीजिए क्योंकि भगवान के साकार रूप का ध्यान करने के लिए यह आवश्यक है फिर पूजा के प्रारंभ में स्वस्तिवाचन किया जाता है। उसके लिए हाथ में पुष्प, अक्षत और थोड़ा जल लेकर स्वतिनः इंद्र वेद मंत्रों का उच्चारण करते हुए परम पिता परमात्मा को प्रणाम किया जाता है।

दीपक पूजन (Lamp worshiper)

अब दीपक को जलाएंगे  और कुछ  फूल  हाथ में लेकर दीपक का ध्यान करते हुए दीप पूजन मंत्र का उच्चारण करें और  फूल  दीपक के पास छोड़े ।और यह मंत्र बोले

भो दीप देवरूप: त्वं कर्मसाक्षी हि अविघ्नकृत्।
यावत् कर्म समाप्ति: स्यात् तावत् अत्र स्थिरोभव ॥

गुरु की पूजा

गुरु का चित्र चौकी पर दाएँ हाथ की ओर ही रखे| सबसे पहले गुरु के चित्र को गीले कपडे से पोंछे, उसके बाद रोली,धूप-दीप,चंदन,फूल  चढ़ायें। फिर दोनों हाथ जोड़कर गुरु के सामने  प्रार्थना करें।और यह मन्त्र बोले –

गुरु: ब्रह्मा गुरु: विष्णु: गुरु: देवो महेश्वर:।
गुरु: साक्षात्परब्रह्म तस्मै श्री गुरुवे नम:।।
अखण्ड मण्डलाकारं व्याप्तं येन चराचरम् ।
तत्पदं दर्शितं येन तस्मै श्री गुरवे नमः ।।
ॐ गुरुवे नम:। ॐ परम गुरुवे नम:।
ॐ परातार गुरुवे नम:। ॐ परमेश्टी गुरुवे नम:।
ॐ गुरु पंक्ते नम:।

Diwali Puja Vidhi In Hindi मंगलतिलक (Mangal Tilak )

अब आप मंगलतिलक करेंगे और इस मंत्र को बोले –

आदित्या वसवो रुद्रा विश्वेदेवा मरुद्गणा:
तिलकं ते प्रयच्छन्तु सर्व कार्य अर्थ सिद्धये॥
इस मंत्र का उच्चारण करते हुए दाएं हाथ से तिलक लगाएं। इसके बाद मौली को बाँधें मौली हमेशा  पुरुष की दाई कलाई और स्त्री की बाई कलाई पर ही  बाँधें।

रक्षा सूत्र मंत्र (Raksha Sutr Mantr )

मौली बाँधते हुये रक्षा-सूत्र मंत्र  यह मन्त्र बोले यह मन्त्र बहुत प्रचलित है

येन बद्धो बलिःराजा दानवेन्द्रो महाबलः ।
तेन त्वामनुबध्नामि रक्षे मा चल मा चलः ॥

स्वस्तिवाचन (Swastivaachan)

फिर पूजा के प्रारंभ में स्वस्तिवाचन किया जाता है। उसके लिए हाथ में पुष्प, अक्षत और थोड़ा जल लेकर स्वतिनः इंद्र वेद मंत्रों का उच्चारण करते हुए परम पिता परमात्मा को प्रणाम किया जाता है दाएँ हाथ में अक्षत-पुष्प एवं ताम्बूल लेकर स्वस्तिवाचन करें:-

स्वस्तिन: इन्द्रो वृद्ध श्रवाः ।
स्वस्ति नः पूषा विश्ववेदाः ।
स्वस्तिन: स्तार्क्ष्यो अरिष्टनेमिः ।
स्वस्ति नो वृहस्पति: दधातु ॥
पय: पृथिव्यां पय: ओषधीषु
पयो दिव्यंतरिक्षे पयोधा:।
पयस्वती: प्रदिश: सन्तु मह्यम्।
विष्णो रराटमसि विष्णो: श्नप्त्रेस्थो विष्णो:
स्यू:असि विष्णो: ध्रुवो असि।वैष्णवमसि विष्णवेत्त्वा
ॐ द्यौः शान्ति: अन्तरिक्षग्वं शान्तिः
पृथिवी शान्ति: आपः शान्ति: औषधयः शान्तिः ।
वनस्पतयः शान्ति: विश्वेदेवाः शान्ति: ब्रह्म शान्तिः
सर्वग्वं शान्तिः शान्ति: एव शान्तिः सा मा शान्तिरेधि ॥
ॐ गणानां त्वा गणपति ग्वं हवामहे प्रियाणां त्वा
प्रियपति ग्वं हवामहे निधीनां त्वा निधिपति ग्वं हवामहे
व्वसो मम।आहमजानि गर्ब्भधम् आत्त्वमजासि गर्ब्भधम्।
ॐ अम्बे अम्बिके अम्बालिके न मा नयति कश्चन।
ससस्त्य श्वक: सुभद्रिकां काम्पील वासिनीम्॥
उसके बाद अक्षत , ताम्बूल गणेश जी के पास छोड़ दें।

गौरी-ग़णेश स्मरण: –

अब गौरी गणेश की पूजा करेंगे उसके लिए दाएँ हाथ में अक्षत-पुष्प लेकर  नीचे लिखे हुए मंत्र का उच्चारण करे और माता गौरी और गणेश जी का ध्यान करें:-
गजाननं भूतगणादि सेवितं कपित्थजम्बूफलचारुभक्षणम्।
उमासुतं शोकविनाशकारकं नमामि विघ्नेश्वरपादपंकजम् ॥
शुक्लाम्बर धरं विष्णुं शशिवर्णं चतुर्भुजम् ।
प्रसन्नवदनं ध्यायेत् सर्व विघ्न उपशान्तये ॥
अभीप्सित अर्थ सिध्यर्थं पूजितो य: सुरासुरै:।
सर्वविघ्नहर:तस्मै गणाधिपतये नम:॥
सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके ।
शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते ॥
हाथ में लिए हुए अक्षत एवं पुष्प गणेशा और गौरी पर चढ़ा दे

Diwali Puja Vidhi In Hindi :- सभी देवताओं- गौरी,गणेश,विष्णु का ध्यान  ,नमस्कार :-

हाथ मे अक्षत लेकर नाम के साथ थोड़-थोड़ा अक्षत छोड़ें ।हर मन्त्र को बोलने के बाद अक्षत छोड़े
ॐ सर्वेभ्योदेवेभ्यो नम: 
ॐ सर्वेभ्यो ब्राह्मणेभ्यो नम:
ॐ मातृ-पितृ चरणकमलेभ्यो नम: 
ॐ एतत् कर्मप्रधानदेवता महालक्ष्म्यै नम: 
॥ इति नमस्कृत्य ॥

संकल्प 

आप हाथ में अक्षत लें, पुष्प और जल ले लीजिए। कुछ द्रव्य भी ले लीजिए। द्रव्य का अर्थ है कुछ धन। ये सब हाथ में लेकर संकल्प मंत्र को बोलते हुए संकल्प कीजिए कि मैं अमुक व्यक्ति अमुक स्थान व समय पर अमुक देवी-देवता की पूजा करने जा रहा हूं जिससे मुझे शास्त्रोक्त फल प्राप्त हों।

अब घी का दीपक जलाए और लक्ष्मी जी का और गणेश जी की पूजा करे |

Diwali Puja Vidhi In Hindi

श्री लक्ष्मी जी आरती

ॐ जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता।
तुमको निशिदिन सेवत, हरि विष्णु विधाता॥
ॐ जय लक्ष्मी माता॥
उमा, रमा, ब्रह्माणी, तुम ही जग-माता।
सूर्य-चन्द्रमा ध्यावत, नारद ऋषि गाता॥
ॐ जय लक्ष्मी माता॥
दुर्गा रुप निरंजनी, सुख सम्पत्ति दाता।
जो कोई तुमको ध्यावत, ऋद्धि-सिद्धि धन पाता॥
ॐ जय लक्ष्मी माता॥
तुम पाताल-निवासिनि, तुम ही शुभदाता।
कर्म-प्रभाव-प्रकाशिनी, भवनिधि की त्राता॥
ॐ जय लक्ष्मी माता॥
जिस घर में तुम रहतीं, सब सद्गुण आता।
सब सम्भव हो जाता, मन नहीं घबराता॥
ॐ जय लक्ष्मी माता॥
तुम बिन यज्ञ न होते, वस्त्र न कोई पाता।
खान-पान का वैभव, सब तुमसे आता॥
ॐ जय लक्ष्मी माता॥
शुभ-गुण मन्दिर सुन्दर, क्षीरोदधि-जाता।
रत्न चतुर्दश तुम बिन, कोई नहीं पाता॥
ॐ जय लक्ष्मी माता॥
महालक्ष्मीजी की आरती, जो कोई जन गाता।
उर आनन्द समाता, पाप उतर जाता॥
ॐ जय लक्ष्मी माता॥

 Shri Lakshmi Ji Aarti

Om Jai Lakshmi Mata, Maiya Jai Lakshmi Mata।
Tumako Nishidin Sevat, Hari Vishnu Vidhata॥
Om Jai Lakshmi Mata॥
Uma Rama Brahmani, Tum Hi Jag-Mata।
Surya-Chandrama Dhyavat Naarad Rishi Gata॥
Om Jai Lakshmi Mata॥
Durga Roop Niranjani, Sukh Sampatti Data।
Jo Koi Tumako Dhyavat, Riddhi-Siddhi Dhan Pata॥
Om Jai Lakshmi Mata॥
Tum Patal-Nivasini, Tum Hi Shubhdata।
Karma-Prabhav-Prakashini, Bhavanidhi Ki Trata॥
Om Jai Lakshmi Mata॥
Jis Ghar Mein Tum Rahti, Sab Sadgun Aata।
Sab Sambhav Ho Jata, Man Nahi Ghabrata॥
Om Jai Lakshmi Mata॥
Tum Bin Yagya Na Hote, Vastra Na Koi Pata।
Khan-Pan Ka Vaibhav, Sab Tumase Aata॥
Om Jai Lakshmi Mata॥
Shubh-Gun Mandir Sundar, Kshirodadhi-Jata।
Ratna Chaturdash Tum Bin, Koi Nahi Pata॥
Om Jai Lakshmi Mata॥
Mahalakshmi Ji Ki Aarti, Jo Koi Jan Gata।
Ur Anand Samata, Paap Utar Jata॥
Om Jai Lakshmi Mata॥

श्री गणेशजी की आरती

जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती पिता महादेवा॥ x2
एकदन्त दयावन्त चारभुजाधारी
माथे पर तिलक सोहे मूसे की सवारी। x2
(माथे पर सिन्दूर सोहे, मूसे की सवारी)
पान चढ़े फूल चढ़े और चढ़े मेवा
(हार चढ़े, फूल चढ़े और चढ़े मेवा)

लड्डुअन का भोग लगे सन्त करें सेवा॥ x2

जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती पिता महादेवा॥
अँधे को आँख देत कोढ़िन को काया
बाँझन को पुत्र देत निर्धन को माया। x2
‘सूर’ श्याम शरण आए सफल कीजे सेवा
माता जाकी पार्वती पिता महादेवा॥ x2
(दीनन की लाज राखो, शम्भु सुतवारी )
(कामना को पूर्ण करो, जग बलिहारी॥)
जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती पिता महादेवा॥

Shri Ganesha Ji Aarti

Jai Ganesh, jai Ganesh, jai Ganesh deva |
Mata jaki Parvati, pita Mahadeva ॥ x2
Ek dant dayavant, char bhuja dhari
Mathe par tilak sohe, muse ki savari | x2
Pan chadhe, phul chadhe, aur chadhe meva
Ladduan ka bhog lage, sant kare seva ॥ x2
Jai Ganesh, jai Ganesh, jai Ganesh deva |
Mata jaki Parvati, pita Mahadeva ॥
Andhan ko ankh det, kodhin ko kaya
Banjhan ko putra det, nirdhan ko maya | x2
Surya shaam sharan aye, safal kije seva.
Mata jaki Parvati, pita Mahadeva ॥ x2
Jai Ganesh, jai Ganesh, jai Ganesh deva|
Mata jaki Parvati, Pita Mahadeva ॥ x2

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