दिवाली सुरक्षित कैसे मनाये : Celebrating Deepawali/Diwali Tips In Hindi

दिवाली सुरक्षित कैसे मनाये : Celebrating Deepawali Tips In Hindi

दिवाली सुरक्षित कैसे मनाये : दिवाली यानी फ्रेंड्स-रिश्तेदारों से मिलना-जुलना, मिठाइयां खाना,  पटाखे चलाना और बहुत सारी मौज-मस्ती। लेकिन दिवाली पर अगर  सावधानी  न बरती जाए तो खुशियों का यह त्योहार कुछ लोगों के लिए प्रॉब्लम भी बन सकता है। जानते हैं दिवाली से जुड़ी प्रॉब्लम और उनके समाधान के बारे में, दिवाली पर सबसे अधिक घटनाएं आग लगने और जलने की होती हैं। इसके अलावा प्रदूषण और तेज धमाकों की वजह से आंखों में जलन, दम घुटने, हार्ट अटैक और कान बंद होने जैसी समस्याए भी आम हैं। अस्थमा के मरीजों, बड़े बुजुर्गों, बच्चों के अलावा घर के पालतू जानवरों को इस मौके पर खास देखभाल की जरूरत होती है।

दिवाली पर धमाल के लिए राजधानी तैयार है। आज रात रंग बिरंगी आतिशबाजी से हिल्स क्वीन चमक उठेगी। दिवाली पर धमाके करने के लिए राजधानी में बॉलीवुड के हीरो और हीरोइनों के नाम के पटाखे बिक रहे हैं। पटाखा कारोबारी आशीष कुमार ने बताया कि इस साल लोग सस्ते दामों पर मिलने वाले चाइनीज पटाखों की बजाय ब्रांडेड कंपनियों के पटाखों को ज्यादा प्राथमिकता दे रहे हैं। लोग प्रदूषण रहित पटाखों की मांग कर रहे हैं।थोक विक्रेताओं के मुताबिक इस साल पटाखों की कीमतों में 20 फीसदी तक की वृद्धि हुई है। इस कारण बाजार गिरा है। पिछले वर्ष से तुलना की जाए तो इस वर्ष 25 फीसदी कारोबार कम हुआ है। दिवाली पर इस वर्ष ग्राहकों को लुभाने के लिए गिफ्ट करने के लिए पटाखे भी आकर्र्षक गिफ्ट पैक में तैयार किए हैं। इन गिफ्ट पैक की कीमत 750 से 1500 रुपये तक की है।

दिवाली सुरक्षित कैसे मनाये : ऐसे करें बचाव

  •  मोमबत्ती या दीया परदों या किसी और कपड़े के आसपास न रखें।
  • इन्हें गैस, पेट्रोल, ऑयल आदि से भी बचाकर रखें। घर में छोटे बच्चे हैं तो इन्हें उनकी पहुंच से दूर रखें।
  • अक्सर लोग बालकनी की दीवार पर मोमबत्ती या दिये रखते हैं, जिनके अक्सर नीचे गिरने का खतरा होता है। इससे बचे
  •  हमेशा लाइसेंसधारी और विश्वसनीय दुकानों से ही पटाखे खरीदें। उन पर लगा लेबल देखें और वहां दिए गए निर्देशों का पालन करें।
  • पटाखे खुली जगह में जलाएं और देखें कि आसपास आग पकड़ने वाली कोई चीज (पेट्रोल, कपड़ा, रुई, लकड़ी, भूसा आदि) न हो
  • बिजली के तारों के आसपास पटाखे बिल्कुल न जलाएं।
  • एक पटाखा जलाते वक्त बाकी पटाखे आसपास न रखें। जब कोई दूसरा पटाखा चला रहा हो, उस वक्त आप पटाखा चलाने से बचें। पटाखे जलाने के लिए माचिस या लाइटर का इस्तेमाल बिल्कुल न करें क्योंकि इसमें खुली फ्लेम होती है, जोकि खतरनाक हो सकती है।
  • पटाखा जलाने के लिए स्पार्कलर, फुलझड़ी या लंबी लकड़ी का इस्तेमाल करें ताकि पटाखे से आपके हाथ दूर रहें और जलने का खतरा न हो।
  • पटाखे झुककर न जलाएं। हाथ में लेकर तो बिल्कुल न जलाएं। अक्सर लोग अनार हाथ में लेकर जलाने लगते हैं। यह खतरनाक है।
  • पटाखे को टिन या शीशे की बोतल में रखकर कभी न चलाएं।
  • पटाखे जलाते वक्त पैरों में जूते-चप्पल जरूर पहनें और चेहरा दूर रखें। हो सके तो प्लेन ग्लास वाले चश्मे पहनें ताकि चिनगारी आंख में न जा पाए।
  • रॉकेट जैसे पटाखे जलाते वक्त देखें कि उनकी नोक खिड़की, दरवाजे और किसी खुली बिल्डिंग की तरफ न हो और उनके ऊपर पेड़, बिजली के तार आदि भी न हों।
  • अगर किसी पटाखे को जलने में बहुत ज्यादा वक्त लग रहा हो तो उसे दोबारा न जलाएं, बल्कि किसी सुरक्षित जगह पर फेंक दें
  • पास में बाल्टी भरकर पानी रखें और जले हुए पटाखे उसी में डालें।
  • पटाखे जलाते वक्त कॉटन के फिटिंग वाले कपड़े पहनें। लूज कपड़ों (साड़ी, लहंगा, चुन्नी, अनारकली सूट, प्लाज़ो आदि) के लहराकर चिनगारियों की चपेट में आने का खतरा रहता है तो सिंथेटिक कपड़े आग जल्दी पकड़ते हैं और जलकर शरीर से चिपक जाते हैं।
  • पटाखों पर लगा लेबल देखें और उस पर दिए गए निर्देशों का पालन करें।
  • अगर बिजली से जुड़ी चीज से आग लग जाए तो उसे पानी से न बुझाएं, बल्कि रेत डालकर बुझाए
  • दो या तीन व्यक्ति मिलकर पटाखे चलाएं ताकि हादसे की स्थिति में दूसरे की मदद हो सके।
  • मोमबत्ती या फिर अगरबत्ती से ही पटाखों को उचित दूरी पर रखकर जलाएं
  • बड़ों की देखरेख में पटाखों का मजा लें
  • पुराने शहर में खास सावधानी बरतें
  • पार्किंग, वाहनों के पास बम न फोड़े
  • अस्पतालों से दूरी बनाकर पटाखे करें 
  • चोट लगने पर प्राकृतिक रूप से पलकें स्वयं बंद हो जाती हैं। इन्हें बंद ही रहने दें।
  • जलन, दर्द और छटपटाहट होने पर घबराएं नहीं। दर्द निवारण के लिए दर्द निवारक टेबलेट ले सकते हैं।
  • आंखों को धोएं नहीं। अपनी या किसी दूसरे की सलाह पर नेत्रों में दवा डालने का प्रयास बिलकुल न करें। 
  • पटाखों को सड़क पर या अन्य किसी सार्वजनिक स्थान पर नहीं जलाएं
  • पटाखों को हाथ में पकड़ कर न जलाएं। जमीन पर रखकर जलाएं
  • जलाने के बाद अगर पटाखा न जले तो उस पर पानी डाल दें।
  • पटाखों के भंडार को पटाखे जलाने के स्थान के पास न रखें।
  • छोटे बच्चों को स्वयं पटाखे जलाने को न दें।
  • जलते पटाखे किसी व्यक्ति पर न फेंके
  • आप घर या बाहर जहां भी पटाखे जला रहे हों, ध्यान रखें कि उसके आसपास आसानी से जलने वाली कोई चीज मसलन पेट्रोल, डीजल, केरोसिन या गैस सिलिंडर वगैरह न रखा हो।
  • पटाखे हमेशा अच्छे ब्रांड के ही खरीदें। कुछ लोग घर पर अनार और अन्य पटाखे बनाकर बाजार में बेचते हैं। यह पटाखे अक्सर हादसे का कारण बनते हैं।
  • पटाखे छुड़ाते समय बच्चों के साथ रहें और उन्हें पटाखे चलाने का सुरक्षित तरीका बताएं
  • रॉकेट जैसे पटाखे जलाते वक्त यह तय कर लें कि उसकी नोक खिड़की, दरवाजे और किसी खुली बिल्डिंग की तरफ न हो। यह दुर्घटना की वजह बन सकता है।
  •  पटाखों के साथ एक्सपेरिमेंट या खुद के पटाखे बनाने की कोशिश न करें।
  • सड़क पर पटाखे जलाने से बचें।
  •  एक पटाखा जलाते वक्त बाकी पटाखे आसपास न रखें।
  •  कभी भी अपने हाथ में पटाखे न जलाएं। इसे नीचे रखकर जलाएं।
  • जलने के ज्यादातर हादसे अनार जलाने के दौरान होते हैं। इसलिए अनार जलाते वक्त खास एहतियात बरतें। हो सके तो खुद और बच्चों को भी आंखों में चश्मा लगा लें।

गर्भवती महिलाएं रखें खास ख्याल– गर्भवती महिलाएं जिन्हें सांस की समस्या हो उन्हें प्रदूषण से दूर रहना चाहिए। खासकर यदि किसी महिला को अस्थमा है तो उन्हें हर वक्त अपने साथ इनहेलर रखना चाहिए। एलर्जी के खतरे को कम करने के लिए जब तक संभव हो सजावट की फूलमालाएं आदि को घर से बाहर ही रखें। पटाखों से फैले प्रदूषण से भी बचकर रहना चाहिए। ये प्रदूषण पेट में पल रहे मासूम के लिए ठीक नहीं।वातावरण से जो कार्बन मोनोऑक्साइड सांस के जरिये लेंगी वह शरीर में आक्सीजन के उपयुक्त संचरण में बांधा पहुंचाते हैं। यह हानिकारक गैस भ्रूण के प्लेसेंटा से होकर गुजरे तो गर्भ में पल रहे बच्चे को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिल पाती। अकसर महिलाएं त्योहार की तैयारियों में व्यस्त होकर भोजन के प्रति लापरवाही कर जाती हैं।

उन्हें थोड़ी मात्रा में 1 से 2 घंटे के अंतराल पर पौष्टिक भोजन ग्रहण करना चाहिए। संभव हो तो हर घंटे में पानी पीते रहना चाहिए। ऐसा करने से चक्कर आने की समस्याएं बेहोशी और सुस्ती से आप खुद को बचा सकती हैं। चिकित्सकों ने सलाह दी है कि आतिशबाजी के दौरान गर्भवती महिलाएं बाहर न निकलें।

दिवाली सुरक्षित कैसे मनाये : जल जाएं अगर

जलने की दो हालत होती है: एक सुपरफिशल बर्न यानी हल्का जलना और दूसरी डीप बर्न यानी गहरा जलना। सुपरफिशियल बर्न में दर्द और छाले हो जाते हैं और यह ज्यादा गंभीर नहीं है। डीप बर्न में शरीर का जला हिस्सा सुन्न हो जाता है और यह गंभीर स्थिति है।
मेडिकल बर्न चार्ट में एक हथेली के बराबर जलने को 1 फीसदी मानते हैं। बच्चों के 10 फीसदी और बड़ों के 15 फीसदी तक जलने पर घबराने की जरूरत नहीं। ऐसा होने पर जले हुए हिस्से को करीब 15-20 मिनट तक बहते पानी में रखें। इससे जलन कम होती है और छाले भी नहीं पड़ेंगे। जलन शांत न हो तो ऑलिव ऑयल लगाएं। परेशानी कम न हो तो डॉक्टर के पास जाएं।

लेकिन बरनॉल, नीली दवा, स्याही, टूथपेस्ट आदि न लगाएं। इससे डॉक्टर के पास जाने पर उसे इन सब चीजों को साफ करने में दिक्कत आती है और समय बर्बाद होता है। दूसरे, डॉक्टर को दिख नहीं पाता कि मरीज कितना जला है। इससे सही इलाज में दिक्कत आती है।जले-झुलसे हिस्से पर कुछ लोग बर्फ लगा देते हैं। बहुत हल्का जलने पर 5 मिनट तक बर्फ रख सकते हैं लेकिन इससे ज्यादा देर रखने पर हाइपोथर्मिया (शरीर का तापमान गिरना) का खतरा हो सकता है।जलने पर सिल्वर सल्फाडाइजीन (Silver Sulfadiazine) क्रीम लगाएं। यह मार्केट में एलोरेक्स (Alorex), बर्निल (Burnil), बर्न एड (Burn Aid), हील (Heal) आदि ब्रैंड नेम से मिलती है। इसके अलावा, सोफ्रामाइसिन (Soframycin), नियोस्पॉरिन (Neosporin) या सिल्वेरेक्स क्रीम (Silverex) भी लगा सकते हैं। ये ऐंटिबायोटिक क्रीम हैं।

ऐंटिबायोटिक क्रीम बाहरी बैक्टीरिया को तो रोकती ही हैं, डेड स्किन के नीचे पनप रहे बैक्टीरिया को भी कंट्रोल करती हैं। क्रीम-मरहम पर रुई लगाकर हल्की पट्टी बांध दें ताकि दवा छूटे नहीं। ऐसे बैक्टीरिया से भी बचाव होता है। दर्द और जलन होने पर पैरासिटामॉल (क्रोसिन Crocin आदि), इबू-प्रोफेन (ब्रूफेन Brufen आदि) पेनकिलर ले सकते हैं। अगर एलर्जी न हो तो एस्प्रिन (डिस्प्रिन Disprin) की 325 मिलीग्राम की एक गोली ले लें। इससे जलन कम हो जाएगी और स्किन को जल्दी ठीक होने में मदद मिलेगी।पेनकिलर लेने के बाद कम-से-कम आधा घंटा जलन कम होने इंतजार करें क्योंकि कोई भी दवा पेट में जाकर इतना समय घुलने में लेती ही है।बाद में जले के निशान जल्दी दूर करने के लिए फ्यूस्डिन-एच (Fucidin-H) या फ्लूटीबैक्ट (Flutibact) क्रीम लगाएं।
नोट: डॉक्टर की सलाह के बिना कोई दवा इस्तेमाल न करें।

ज्यादा जल जाने पर
कपड़ों में आग लगे तो भागें नहीं क्योंकि भागने पर हवा से ऑक्सिजन मिलने पर आग बढ़ती है। जमीन पर लेट जाएं और शरीर को जमीन पर रोल करें तो आग बुझ जाएगी। पीड़ित को खुले में ले आएं ताकि वह घबराए नहीं और उसे ऑक्सिजन भी मिल सके। उसके कपड़े उतार दें ताकि वे शरीर से चिपके नहीं।

आंख-कान का बचाव
पटाखे चलाने के दौरान कभी-कभार आंखों में चिनगारी गिर जाती है। फिर पटाखों के धुएं से पलूशन काफी बढ़ जाता है। इससे आंखों में जलन की समस्या हो सकती है। यह खराब हवा अस्थमा के मरीजों के लिए भी घातक साबित होती है।
आंख
बच्चे जब भी पटाखे चलाकर वापस आएं, उनकी आंखों को साफ और ठंडे पानी से धुलवाएं। अक्सर दिवाली के दूसरे-तीसरे दिन तक बाहर निकलने पर आंखों में जलन महसूस होती है, क्योंकि हवा में पल्यूशन होता है। आंखों को बार-बार सादा साफ पानी से धोएं। ज्यादा दिक्कत होने पर डॉक्टर की सलाह से कोई आई ड्रॉप इस्तेमाल कर सकते हैं।आंख में हल्की चिनगारी लगने पर भी उसे हाथ से मसलें नहीं और न ही उसे बार-बार छुएं। इससे घाव हो सकता है। आंख को सादे पानी से आंखों को धोएं और जल्दी से डॉक्टर को दिखाएं।
अगर आंख में सेंक लग जाए तो पलकों पर बर्फ या कोल्ड क्रीम लगा लें। रिफ्रेश टीयर (Refresh Tear) या जेंटील (Genteel) नाम के आई ड्रॉप डाल सकते हैं। फिर डॉक्टर को दिखाएं।आंख में जलन होने या कुछ गिर जाने पर गुलाब जल या शहद आदि न डालें।
नोट: डॉक्टर की सलाह के बिना कोई दवा इस्तेमाल न करें।

कान
वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन के मुताबिक वे लोग, जो लगातार 85 डेसिबल से ज्यादा शोर में रहते हैं, उनके सुनने की क्षमता प्रभावित हो सकती है। 90 डेसिबल के शोर में रहने की लिमिट सिर्फ 8 घंटे होती है, 95 डेसिबल में 4 घंटे और 100 डेसिबल में 2 घंटे से ज्यादा देर नहीं रहना चाहिए। 120 से 155 डेसिबल से ज्यादा तेज शोर हमारे सुनने की शक्ति को खराब कर सकता है और इसके साथ ही कानों में बहुत तेज दर्द भी हो सकता है। ऐसे पटाखे, जिनसे 125 डेसिबल से ज्यादा शोर हो, उनकी आवाज से 4 मीटर की दूरी बनाकर रखें।ज्यादा तेज वाले बम पटाखे 125 डेसिबल से ज्यादा शोर पैदा करते हैं, इसलिए ज्यादा शोर वाले पटाखे न जलाएं। आसपास ज्यादा शोर हो रहा हो, तो कानों में कॉटन या इयर प्लग का इस्तेमाल करें। छोटे बच्चों का खास ध्यान रखें। कानों में दर्द महसूस होने पर डॉक्टर को दिखाएं। पटाखों की तेज आवाज कानों को नुकसान पहुंचा सकती है। 150 डेसिबल से ज्यादा तेज शोर हमारे सुनने की शक्ति को खराब कर सकता है और इसके साथ ही कानों में बहुत तेज दर्द भी हो सकता है।

अस्थमा
अस्थमा सांस से जुड़ी बीमारी है। दिवाली पर भारी प्रदूषण की वजह से अस्थमा के मरीजों की परेशानी बढ़ जाती है। वैसे भी इन दिनों ठंड बढ़ने लगती है। ऐसे में उन्हें दोहरी शिकायत होती है।पटाखों से निकलने वाली टॉक्सिक गैसों व लेड जैसे पार्टिकल्स की वजह से अस्थमा के मरीजों की सांस की नली सिकुड़ जाती है और पूरी ऑक्सिजन नहीं मिल पाती। थोड़ी-सी भी लापरवाही से अस्थमा का अटैक आ सकता है।दिल के मरीजों की दिक्कतें कई गुना बढ़ जाती हैं| परेशानी से बचने के लिए अस्थमा के मरीज पटाखे जलाने से बचें। धुएं और पल्यूशन से बचने के लिए घर के अंदर रहें। अगर धुआं घर में आ जाए तो एक साफ कॉटन का रुमाल या कपड़ा गीला करके मुंह पर रखें। इससे हानिकारक कण शरीर में अंदर नहीं जा पाएंगे।ज्यादा परेशानी लगे तो डॉक्टर की बताई दवा लें और शांत रहने की कोशिश करें। इनहेलर इस्तेमाल करते हैं तो उसे यूज करें।ज्यादा दिक्कत लगे तो अस्पताल ले जाएं।

पेट्स केयर
अक्सर लोग दिवाली पर पटाखे चलने में इतना मदहोश हो जाते हैं कि वे भूल जाते हैं कि उनके घर या पड़ोस में कोई मासूम पालतू जानवर भी रहता है। दरअसल, कुत्ता या बिल्ली की सुनने की क्षमता बहुत तेज होती है इसलिए पटाखों की तेज आवाजें उसे परेशान कर सकती हैं। उनकी परेशानी को कम करने के लिए आप कुछ कदम उठा सकते हैं।-
अपने पालतू जानवरों को पटाखों से दूर रखें। इन्हें चाटने और सूंघने से भी जानवरों के अंदर जहर जा सकता है।
अपने पालतू जानवर को ऐसे कमरे में रखें जिसमें बहुत ही कम खिड़कियां हों ताकि उसके पास पटाखों की आवाज ना पहुंचे।
अगर आपका डॉगी खुद कहीं जाकर छुपना चाहता हो तो उसे ऐसा करने दें। उसे जबरन बाहर न निकालें।
मुमकिन हो तो दिवाली के दिन अपने डॉगी या कैट के कानों पर मफलर बांधे या उनके कानों में रुई डालें ताकि बाहरी आवाजें उसे परेशान न करें।
दिवाली की रात, जब सबसे ज्यादा पटाखे चलाए जाते हैं, उस वक्त अपने पेट्स को उनकी फेवरिट चीज खाने को दें ताकि उनका ध्यान बंट जाए।
दिवाली से पहले आप डॉक्टर से अपने पेट्स के लिए दवाई ले लीजिए। इसे खाने से डर और चिंता से आराम मिलता है।

दिवाली के दौरान बच्चों की देखभाल
दिवाली का आनंद सबसे अधिक बच्चे ही लेते हैं, लेकिन बच्चे नासमझ होते हैं और छोटी-सी चूक उनके लिए पूरी जिंदगी की मुसीबत बन सकती है। ऐसे में माता-पिता को चाहिए कि पटाखे जलाते समय हमेशा उनके साथ रहें। अस्थमा और एलर्जी की चपेट में आने से बचाएं। पटाखों के जलने से कई तरह के केमिकल निकलते हैं, जोकि एलर्जी के लिए ट्रिगर का काम करते हैं।

सुरक्षित दिवाली कैसे मनाये

भारत के प्रमुख त्योहारों में दीपावली एक अलग स्थान रखता है। धन की देवी मां लक्ष्मी की पूजा कर उनसे धन-धान्य तथा समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। इसके साथ ही दीपावली से जुड़ी एक कहानी यह भी है कि इसी दिन भगवान राम, लंका पर विजय प्राप्त कर अपनी नगरी अयोध्या आए थे। इस खुशी के मौके पर नगरवासियों ने उत्साह स्वरुप पूरे नगर को दीपों से सजाया था। तभी से दीपावली के त्योहार का प्रारंभ माना जाता है।आज के समय में लोग दीपावली के दिन मां लक्ष्मी की पूजा करने के साथ जमकर पटाखे भी छोड़ते हैं। जबकि पटाखे छोड़ना पर्यावरण के हिसाब से तथा लोक स्वास्थ्य के लिए भी नुकसानदेह होता है, लेकिन लोग नहीं मानते। हम आपको बताते हैं कि इस त्योहार को सुरक्षा के साथ तथा परिवार के पूरे आनंद से कैसे मना सकते हैं।

सिंथेटिक कपड़े पहनने से बचें –

दीपावली में बच्चे तथा बडे़ सभी लोग मां लक्ष्मी की पूजा के साथ पटाखे का भी आनंद लेते हैं। घर पर पटाखे जलाना हो तो बड़ो के निगरानी में कॉटन के कपड़ो को ही पहनकर ही उसे जलाऐ। सिंथेटिक कपड़ों को पहनने से बचें।दिवाली की रात जब बच्चे आपके साथ पटाखे जलाएँ तब उनके कपड़ों का खास ध्यान रखें। उस समय उन्हें केवल सूती के कपड़े ही पहनाएँ| इससे कपड़े में आग पकड़ने का खतरा कम ही रहता है, जबकि सिंथेटिक कपड़े आग के संपर्क में आने पर पिघल जाते हैं और त्वचा पर चिपक कर ज़्यादा नुकसान पहुँचते हैं।

बच्चों को निर्देश –

दीपावली में पटाखे जलाना बहुत खतरनाक होता है। अत: हमारा सुझाव यह है कि जहां तक हो सके पटाखे से बचें और बच्चों के भी बचाऐं। बच्चों को बड़ो के दिशानिर्देशन में ही पटाखों का प्रयोग करने के बारे में बताएं। अगर बच्चे पटाखों को लेकर लापरवाह हो रहे हैं तो उन्हें इसके हानियों के बारें में जरुर समझाये।दिवाली पर बच्चे आतिशबाज़ी के लिए बहुत उत्साहित रहते हैं, ऐसे में हो सकता है कि आपको किसी काम में व्यस्त देख कर वे सब्र न रख पाएँ और अकेले ही पटाखें छोड़ने लगें। तो शाम के पहले ही अपने सभी काम निपटा लें और आतिशबाज़ी के समय उनके साथ ही रहें। आपके साथ होने पर वे ज़्यादा आनंदित भी होंगे और साथ ही सुरक्षित भी रहेंगे।

सही जगह चुने-

पटाखे जलाते समय स्थान का चुनाव करना बहुत महत्वपूर्ण है। हमेशा खुले स्थान का प्रयास करें। आग लगने पर बंद स्थान ज्यादा घातक हो सकता है। अतः खुले तथा खाली स्थान पर ही पटाखे जलायें।बच्चों को पटाखें दें और उनके साथ किसी मैदान या किसी खुली जगह पर उन्हें जलाएँ। खासकर अनार या चकरी जलाने के लिए किसी समतल और खुले स्थान का प्रयोग करें। इससे अगर कोई चिंगारी उड़ के इधर उधर गिर जाये तो किसी गंभीर हादसे कि संभावना कम रहती है।

इस्तेमाल में आए पटाखों को नष्ट करना –

इस्तेमाल किए पटाखों को सावधानी के साथ नष्ट करें। उसे आप पानी से भरी बाल्टी में डाल सकते हैं या फिर उसे सावधानी से उठाकर बालू से भरी बाल्टी में रख सकते हैं।

मोमबत्तियां और दीपक –

मोमबत्ती तथा दीपक से ही दीपावली में पूरे घर को रोशन किया जाता है। इसलिए दीपावली में दीपक तथा मोमबत्तियों को लगाते समय यह जरुर ध्यान रखें कि आस-पास कोई पर्दा या अन्य ज्वलनशील पदार्थ न हों।

पालतू जानवरों की सुरक्षा –

दीपावली में घर में रह रहें सभी पालतू जानवरों का विशेष ध्यान रखना चाहिए जिससे उन्हें किसी भी प्रकार का कष्ट न हो। होता यह है कि लोग अपने खुशियों को मनाने के चलते घर में रह रहें अन्य पालतू जानवरों का ध्यान रखना भूल जाते हैं। जिससे उन्हें शारीरिक कष्ट होता है।

 नए प्रयोग न करने दें –

बच्चे स्वभाव से ही बहुत जिज्ञासु होते हैं और उत्साह के दौरान उन्हें नए नए प्रयोग करना अच्छा लगता है। पटाखे जलाने के लिए सेफ तरीका कितना ज़रूरी है, इस बात का आभास उन्हें पहले से कराएं ताकि वे सतर्क रहें, साथ ही बच्चों में किसी बात को दोहराने की प्रवत्ति भी देखी जा सकती है। आपने देखा होगा कि बच्चे अपने साथ  वालों को जैसा करते हुए देखते हैं वे खुद भी वैसा ही काम करने की कोशिश करते हैं। आपने भी देखा होगा कि कुछ लोग टीन के डिब्बों और खाली मटकों का प्रयोग बड़े आकार के पटाखे फोड़ने के लिए करते हैं, बच्चे भी ऐसे रोमांचक प्रयोगों की तरफ जल्दी आकर्षित होते हैं तो बच्चों को ऐसा करने से रोकें और इससे होने वाले नुक़सानों को विस्तार से उन्हें बताएं।

बड़े-बूढ़ों की चिंता –

दीपावली सुख-समृद्धि तथा खुशियों का त्योहार है। अतः इसे मनाते समय यह जरूर ध्यान दे कि आपके अतिउत्साह से किसी का नुकसान न हो। आस-पास रहने वाले सभी लोग पटाखों की तेज आवाज को सहन नहीं कर पाते। अतः इनका बहुत ध्यान रखें।

अगर 10 बजे के बाद चलाए पटाखे
सुप्रीम कोर्ट का आदेश है कि रात 10 बजे से सुबह 6 बजे कर पटाखे ना चलाए जाएं। यह नियम इस साल भी लागू है। अगर कोई ऐसा करता है तो उसकी शिकायत पुलिस से की जा सकती है। इसके लिए आप 100 नंबर या लोकल थाने के नंबर पर कॉल कर सकते हैं।

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