दीपावली कब , क्यों , कैसे मनाते है ? : Information About Deepawali In Hindi

दीपावली कब , क्यों , कैसे मनाते है ? : Information About Deepawali In Hindi :- आप सभी का Deepawali 2018 Blog में हार्दिक स्वागत है , और आज हम आपको दीपावली के बारे में पूरी जानकारी देने वाले हैं , क्योंकि आपके मन भी काफी प्रश्न होंगे कि आखिर दीपावली कब , क्यों , कैसे मनाते है ? तो चलिए जानते है दीपवाली की पूरी कहानी :-

Information About Deepawali In Hindi

दीपावली हिन्दुओ का उत्साह जनक त्योहार है | और पूरा देश दीपावली आने का इंतजार करती है |दीपावली का त्योहार मे  2017 मे 20 अक्तूबर दिन शुक्रवार तथा 2018 मे दीपावली 7 नवम्बर दिन बुधवार को मनाया जाएगा | दीपावली का त्योहार बच्चो को  बहुत ही अच्छा लगता है , और पूरा देश रोशनी से झिलमिला रहा होता है |

दीपावली मे प्रत्येक हिंदुवासी रोशनी की ज्यादा से ज्यादा व्यवस्था करते है, जो की घर मे लक्ष्मी आने का संकेत करती है |  दीपावली के दिन हर व्यक्ति अपने घर ,दुकान ,कार्यालय आदि सभी वस्तुओ की साफ -सफाई की व्यवस्था करते हैं, और माना जाता है की साफ सफाई करने से माता लक्ष्मी का आगमन होता है | जिससे घर मे सुख -शांति तथा धन भी बना रहता है|दीपावली मे भगवान गणेश तथा माता लक्ष्मी की पूजा की जाती है | माना जाता है की प्रत्येक शुभ काम मे चीनी मिट्टी के बर्तन का प्रयोग किया जाता है , और दीपावली मे भी चीनी मिट्टी का प्रयोग किया जाता है | Information About Deepawali In Hindi

दीपावली मे पूजा का समान लेने सभी लोग बाजार जाते है , और पूजा करने के लिए  भगवान गणेश और माता लक्ष्मी की मूर्ति लेते है | जो की चीनी मिट्टी की बनी होती है उसके बाद मिठाई ,पटाके और पूजा की सामाग्री लेते है |मुहूर्त देखने के बाद शाम के समय सभी लोग भगवान गणेश तथा माता लक्ष्मी की पूजा तथा आराधना करते है|  पूजा समाप्त होने के बाद सभी लोग प्रसाद लेते है और अपने बड़े -बुजुर्गो तथा ईश्वर से आशीर्वाद लेकर अपनी खुशियो की कामना करते है |

तथा उसके बाद मंदिरो और  घरो मे दीपक रखकर  घर को अच्छी तरह से घर को सजाते है |और अंतिम समय मे पटाके जलाकर सभी लोग मस्ती मे डूब जाते है दीपावली एक दिन का पर्व नही है दीपावली के साथ धनत्र्योदेशी ,गोवर्धन पूजा और भैयादूज आदि त्योहार मनाए जाते है दीपावली सांस्कृतिक,सामाजिक ,धार्मिक और आर्थिक समस्त प्रकार से दीपावली बहुत महत्वपूर्ण है | घर मे सुख -शांति बने रहे इसलिए माँ लक्ष्मी का उपवास रखते है बताया गया है ,  कि दीपावली के दिन हलवा ,खीर ,पूरी सब्जी ये खास व्यंजन हम लोगो को खाने चाहिए खीर चावल और दूध से मिलकर बनी होती है | अमावस्या के दिन दूध बेचना शुभ नही माना जाता इसलिए प्राचीन समय से ही दूध का उपयोग करने की परम्परा है पूरी सब्जी तो प्रत्येक त्योहार मे बनाई जाती है इसलिए इसे बहुत ही सुभ मानते है |Information About Deepawali In Hindi

दीपावली क्यों मनाते है ?

बताया गया है कि मंथरा के गलत विचारो से पीड़ित हो कर भरत कि माता कैकयी श्री राम जी को उनके पिता दसरथ से  14 वर्ष का वनवास भेजने के लिए वचनव्रद्ध कर देती है , और पिता दसरथ कि आज्ञा का पालन करते हुए श्री राम माता सीता तथा उनके छोटे भाई लक्ष्मण भी वनवास जाने कि जिद करते है , लेकिन श्री राम के मना करने के वावजूद भी लक्ष्मण वनवास जाते है , और तीनों लोग वनवास जाने के लिए निकल पड़ते है | बहुत ही कष्ट प्राप्त करते हुए वो वनवास गए |

उन्होने अपनी एक कुटिया बनाई और उसमे वो सभी लोग रहने लगे एक दिन उनकी कुटिया मे रावण कि बहन आई और वहाँ पर आकर माता सीता के साथ दुष्टता का व्यवहार करने लगती है | कुछ समय बाद लक्ष्मण वहाँ आ जाते है और सूपनखा के नाक -कान काट लेते है जिससे वो क्रोधित होकर अपने भाई रावण के पास जाती है रावण को जब यह  बात पता चलती है तो रावण  भी क्रोधित हो उठता है रावण माता सीता को छल से हरण कर लेता है और वह युद्ध करने की बात करता है राम के साथ भी समस्त वानर सेना होती है |

जिससे यह युद्ध विशाल युद्ध बन जाता है किन्तु प्रभु श्री राम ने रावण को मारकर माता सीता को उसकी कैद से मुक्त करा लेते है | और  श्री राम ,माता सीता तथा लक्ष्मण और वानर सेना अयोध्या मे प्रवेश करते है तो समस्त अयोध्यावासी घी के दिये जलाकर अपनी खुशी को व्यक्त करते है तब से दीपक जलाने की परम्परा शुरू होती है |

बताया गया है कि नरकासुर ने भगवान कि 16 कन्याओ को बंधित कर के रखा हुआ था |जिसके कारण द्वापर युग मे भगवान विष्णु के अवतार से श्री कृष्ण ने दीपावली के दिन ही अत्याचारी राजा नरकासुर का वध कर दिया और सभी देवी कन्याओ को उसके चंगुल से मुक्त करा लिया तब भी लोगो ने प्रसन्नता और हर्ष से घी के दिये जलाए |Information About Deepawali In Hindi

बताया गया है कि महाभारत कि कहानी मे जब कौरवो ने मामा शंकुनी की चाल की मदद से शतरंज के खेल मे पांडवो का सब -कुछ हासिल कर लेते है यहा तक पांडवो ने अपनी पत्नी द्रोपदी को भी दाव पर लगा देते है और उनके साथ चीरहरण करने का अपराध करते है , किन्तु भगवान श्री कृष्ण माता द्रोपदी की लाज को बचाते है और कौरवो ने पांडवो को 13 वर्ष का वनवास दे देते है , जिससे 5 पांडव युधिष्ठिर ,भीम ,अर्जुन ,नकुल और सहदेव वनवास जाते है | जब वे लोग 13 वर्ष का वनवास काट कर आते है तो उनकी आने की खुशी मे उनके राज्य के लोगो ने घी क दीप जलाकर खुशिया मनाई |Information About Deepawali In Hindi

भगवान गणेश जी को पूजा सब देवी -देवताओ से पहले की जाती है , प्रत्येक शुभ  काम करने से पहले गणेश जी की पूजा होती है | गणेश जी को गणपती के नाम से भी जाना जाता है , गणेश की सवारी मूषक है गणेश जी के शरीर की रचना माता पार्वती के द्वारा की गई |  माता पार्वती जब स्नान करने के लिए जाती है तो गणेश को आदेश देती है कि जब तक हम स्नान न कर ले तब तक किसी को भी को अंदर मत आने देना कुछ समय बाद शंकर जी का आगमन होता है |और वो अंदर जाने का प्रयास करते है तो गणेश जी उनको वही पर रोक लेते है और कहते है कि आप अंदर नही जा सकते है शंकर जी को गुस्सा आता है , और वो गणेश का सिर धड़ से अलग कर देते है|  चीखने कि आवाज सुनकर माता पार्वती बाहर आकर गणेश को देखकर रोने लगती है तो शंकर जी गणेश को हाथी के मुख का रूप देते है समस्त देवी -देवता गणेश को आशीर्वाद देते है और उन्हे प्रथम पूज्य का वरदान देते है इसलिए गणेश जी को संसार मे सर्वप्रथम पूजा जाता है | गणेश जी को दो दन्त थे जो बहुत ही सुसोभित लगते थे किन्तु परशुराम जी के साथ युद्ध करने मे भगवान गणेश का एक दन्त टूट जाता है ,जिससे वो एक दन्त से भी जाने जाते है |

दीपावली कब  मनाते है ?

शास्त्रो के अनुसार माना गया है कि लक्ष्मी पूजन विशेष मुहूर्त मे की जाती है जिसके अनुसार माता लक्ष्मी पूजन प्रदोष काल मे सूर्यास्त के बाद करना चाहिए और कुछ मान्यताओ के अनुसार लक्ष्मी पूजन महानिशिता काल मे करना अधिक शुभ माना जाता है |प्रदोष काल मे सूर्यास्त मे लक्ष्मी पूजन का सही समय स्थिर लग्र को माना जाता है |2017 मे दीपावली का मुहूर्त 19:44 से 20:38 तक था तथा 2018 मे दीपावली का मुहूर्त 19:44 से 20:38 तक बताया जा रह है |

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